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श्री गुरु नानक देव  स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गीता जयंती मनाई गई।

श्री गुरु नानक देव स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गीता जयंती मनाई गई।

नानकमत्ता :(चरनसिंह सरारी) श्री गुरु नानक देव स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में आज गीता जयंती मनाई गई। कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय की प्राचार्य डां० सीता मेहता ने मां सरस्वती एवं योगेश्वर श्रीकृष्ण के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन के साथ किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय की प्रथम  सेमेस्टर की छात्रा शीला भट्ट एवं शुभांगी जोशी ने श्री कृष्ण भजन गाया कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्य डां० सीता मेहता ने भगवत गीता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह हमें संकटों और हिम्मत से लड़ने की प्रेरणा देती है और मानव मात्र को जीवन में प्रतिक्षण आने वाले छोटे- बड़े संग्राम के सामने हिम्मत से खड़े रहने की शक्ति देती है और कहा कि महाभारत में युद्ध भूमि पर खड़े अर्जुन और कृष्ण के बीच संवाद से हर मनुष्य को प्रेरणा लेनी चाहिए। संस्कृत प्राध्यापक डॉ० मनोज जोशी ने कहा कि आज गीता जयंती का महत्वपूर्ण एवं खास दिन है आज के ही दिन भगवत गीता का जन्म हुआ था इस पवित्र ग्रंथ गीता की आज 5159 वी वर्षगांठ है गीता जयंती वह दिन है जब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता ज्ञान समझाया था ब्रह्म पुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को भगवत गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए यह तिथि गीता जयंती के नाम से भी प्रसिद्ध है उन्होंने कहा कि भगवत गीता के पठन-पाठन श्रवण -मनन और चिंतन से जीवन  में श्रेष्ठता के भाव आते हैं गीता का चिंतन अज्ञानता के आचरण को हटाकर आत्मज्ञान की ओर प्रवृत्त करता है गीता भगवान का श्वास और भक्तों का विश्वास है गीता ज्ञान का अद्भुत भंडार है हम सब हर काम में तुरंत नतीजा चाहते हैं लेकिन भगवान ने कहा है कि धैर्य के बिना अज्ञान, दुख ,मोह, क्रोध ,आदिसे निवृत्ति नहीं मिलती गीता केवल धर्म ग्रंथ ही नहीं यह एक अनुपम जीवन ग्रंथ है जीवन उत्थान के लिए इसका स्वाध्याय हर व्यक्ति को करना चाहिए। गीता एक दिव्य ग्रंथ है यह हमें पलायन से पुरुषार्थ की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है हिंदी विभाग के प्राध्यापक तेज प्रकाश जोशी ने कहा की गीता जीवन का सार है जिसे पढ़कर कलयुग में मनुष्य जाति को सही राह मिलती है इसके महत्व को बनाए रखने के लिए ही  गीता जयंती मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र का मैदान गीता की उत्पत्ति का स्थान है गीता के 18 अध्याय में मनुष्य के सभी धर्म एवं कर्म का ब्यौरा है इसमें सत युग से कलि युग तक के मनुष्य के कर्म एवं धर्म का ज्ञान है गीता के श्लोकों में मनुष्य जाति का आधार छिपा है मनुष्य का  क्या कर्तव्य है,उसका क्या धर्म है इसका विस्तार स्वयं श्री कृष्ण ने बताया है आत्मज्ञान के लिए हम सभी को भगवत गीता अवश्य पढ़नी चाहिए। कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र- छात्राओं ने श्री कृष्ण एवं भगवत गीता के महत्व पर भाषण प्रस्तुत किए इस अवसर पर  कविंद्र सिंह बोरा, डॉ० सरस्वती भट्ट, डॉ० आऱ०के० सिंह ,शोभा बोहरा ,ज्योति, गोपाल सिंह ,रोशन कुमार ,मनोज कुमार , प्रिया, कामिनी राना, रश्मि, अफ्शा खान, , वर्षा सक्सैना, रश्मि राना, नीमा गोस्वामी, पूनम राना,दुर्गा नाथ गोस्वामी और महेश कुमार सहित तमाम महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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