तीन वर्षीय मासूम की मौत से मचा हड़कंप, निजी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप,उल्टी की शिकायत पर भर्ती बच्ची ने उपचार के दौरान तोड़ा दम, परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा,अस्पताल प्रबंधन पर अभद्रता और धमकी देने का आरोप, पुलिस ने शुरू की जांच,थोक दवा दुकान पर खुदरा बिक्री का दावा, मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट की मौजूदगी पर भी उठे सवाल।
11 अक्टूबर, 2026
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सितारगंज/उधमसिंहनगर:(चरनसिंह सरारी) उल्टी की शिकायत के बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराई गई तीन वर्षीय मासूम की उपचार के दौरान मौत होने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सक पर उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर अभद्रता करने और धमकी देने का आरोप भी लगाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने तहरीर मिलने की पुष्टि करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।मासूम की मौत के बाद अब अस्पताल में किए गए उपचार, चिकित्सकीय निगरानी और बच्ची की हालत बिगड़ने पर अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपचार में लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच, चिकित्सकीय अभिलेखों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी।
रविवार को उल्टी की शिकायत पर अस्पताल पहुंचे थे परिजन।
जानकारी के अनुसार, शक्तिफार्म के ग्राम गुरुग्राम निवासी विष्णुकांत दास की तीन वर्षीय बेटी प्रज्ञा दास को रविवार को उल्टी की शिकायत हुई थी। बच्ची की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे उपचार के लिए सितारगंज में संजोग गार्डन के निकट स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों के मुताबिक, वहां चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार करने के बाद बच्ची को घर भेज दिया था।
परिजनों का कहना है कि सोमवार को बच्ची की तबीयत दोबारा बिगड़ने लगी। इसके बाद वे उसे फिर उसी अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि चिकित्सक ने बच्ची में फूड प्वाइजनिंग के लक्षण बताते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। चिकित्सक की सलाह पर परिजनों ने बच्ची को भर्ती करा दिया, जहां उसका उपचार शुरू किया गया।परिवार को उम्मीद थी कि अस्पताल में उपचार मिलने से बच्ची की हालत में सुधार आएगा और वह जल्द स्वस्थ होकर घर लौटेगी। लेकिन देर रात उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद परिवार की चिंता बढ़ गई और अस्पताल में उपचार को लेकर परिजनों के मन में कई सवाल खड़े होने लगे।
रात करीब एक बजे बिगड़ी हालत, सुबह हो गई मौत,
परिजनों के अनुसार, सोमवार रात करीब एक बजे बच्ची की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। चिकित्सक ने उसका उपचार किया, लेकिन मंगलवार सुबह बच्ची ने दम तोड़ दिया। मासूम की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और अस्पताल परिसर में शोक के साथ आक्रोश का माहौल बन गया।
बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि बच्ची की हालत बिगड़ने के दौरान उसकी देखभाल और उपचार में अपेक्षित सावधानी नहीं बरती गई। परिजनों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।हालांकि, बच्ची की तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारण, उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और मौत की परिस्थितियों को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इन सभी बिंदुओं पर जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अस्पताल परिसर में हंगामा, प्रबंधन पर अभद्रता का आरोप।
मासूम की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल में उपचार को लेकर सवाल उठाते हुए हंगामा किया। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन से जुड़े लोगों पर परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार करने और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह स्थिति को शांत कराया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।परिजनों की ओर से उठाए गए सवालों और लगाए गए आरोपों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में उपचार संबंधी अभिलेखों, अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं और घटना के दौरान अपनाई गई चिकित्सकीय प्रक्रिया के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं।
थोक की दुकान पर खुदरा दवा बिक्री का आरोप।
मासूम की मौत के मामले के बीच क्षेत्र में दवाइयों की बिक्री के तरीके को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि थोक दवाइयों की बिक्री के लिए संचालित दुकान पर खुदरा बिक्री की जा रही है। इस दावे के सामने आने के बाद संबंधित प्रतिष्ठान के लाइसेंस, बिक्री व्यवस्था और दवा कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच किए जाने की आवश्यकता जताई जा रही है।दवा कारोबार से जुड़े नियमों के तहत संबंधित प्रतिष्ठान किस श्रेणी के लाइसेंस पर संचालित हो रहा है और उसकी बिक्री गतिविधियां लाइसेंस की शर्तों के अनुरूप हैं या नहीं, यह जांच का विषय है। हालांकि, फिलहाल थोक दुकान पर खुदरा बिक्री के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। संबंधित औषधि नियंत्रण विभाग की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।स्थानीय स्तर पर उठ रहे इन सवालों के बीच संबंधित विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि नियमों के उल्लंघन की शिकायत सामने आती है, तो नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग उठ सकती है।
मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट की मौजूदगी को लेकर भी सवाल।
संबंधित मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट की मौजूदगी को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि दुकान पर फार्मासिस्ट मौजूद नहीं रहता। इस आरोप के बाद प्रतिष्ठान में दवाइयों की बिक्री, फार्मासिस्ट की नियुक्ति और लाइसेंस संबंधी शर्तों के अनुपालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।दवा बिक्री से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए यह जांचना आवश्यक है कि प्रतिष्ठान के पास वैध लाइसेंस है या नहीं और जहां फार्मासिस्ट की उपस्थिति अनिवार्य है, वहां निर्धारित व्यवस्था का पालन किया जा रहा है या नहीं। संबंधित विभाग के अभिलेखों और मौके पर की जाने वाली जांच से ही इन दावों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।
हालांकि, अभी तक फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति अथवा नियमों के उल्लंघन की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों को जांच के दायरे में रखते हुए संबंधित विभाग से तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट किए जाने की अपेक्षा है।
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें।
तीन वर्षीय प्रज्ञा दास की मौत के मामले में पुलिस ने तहरीर मिलने की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से बच्ची की मौत की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए उपचार में लापरवाही, अभद्रता और धमकी के आरोपों की जांच के साथ-साथ दवाइयों की बिक्री तथा मेडिकल स्टोर के संचालन से जुड़े दावों का सत्यापन भी जरूरी है। इन दोनों पहलुओं की जांच संबंधित तथ्यों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की जानी चाहिए।मासूम की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहे हैं। अब पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और संबंधित विभागों की ओर से होने वाली कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटना में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं तथा दवा कारोबार से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।