विवादित किताब के खिलाफ सड़कों पर उतरा थारू समाज
सितारगंज। प्रोफेसर अजय सिंह रावत द्वारा लिखित उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के पाठड्ढक्रम की पुस्तक में उत्तराखण्ड का समय राजनैतिक इतिहास चैप्टर में जनजाति के लिए प्रयुक्त अपमानजनक शब्द लिखने से नाराज थारू समाज के लोगों ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ो की संख्या में महिलाएं पुरुष हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए विभिन्न मार्गों से होते हुए कोतवाली पहुंचे यहां पर उन्होंने प्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन सौंपा दिए गए ज्ञापन में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रो 0 अजय सिंह रावत द्वारा लिखित पुस्तक का राजनैतिक इतिहास में थारू जनजाति पर प्रयुक्त किये गए अपमान जनक शब्दों के कारण प्रतिबंधित कर पाठड्ढक्रम से हटाने की मांग की। बताया कि उक्त पुस्तक में जनजति का वर्णन मात्र कुछ लोगों के मत के आधार पर किसी अन्य व्यक्ति के विचार के आधार पर मार ख पियक्कड़ आदि अपमान जनक शब्दों से सम्बोधित किया गया है जो न तो यह थारु जनजाति पर किये गए तथ्यपूर्ण साँघ का नाम है और न ही थारु जनजाति के लोगों पर किये गए किसी सर्वे के आधार पर है । मात्र संभावनाओं के आधार पर किसी सम्पूर्ण जनजाति समाज के सम्बन्ध में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना व उसे एक श्रेणी का बताना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण एवं अधस्य कृत्य है । जो सम्पूर्ण थारू जनजाति समाज का अपमान है । थारु जनजाति के लोग महाराणा प्रताप के वंशज है जो उनकी पूजा पद्धति रीती रिवाज परम्पराओं पहनावा आदि से सिद्ध होता है । प्रो. अजय सिंह रावत के इस कृत्य के कारण हमारे समाज के लोगों में आने वाली पीढ़ी को भविष्य में अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है । उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुये कहा कि उक्त पुस्तक को तत्काल प्रतिबंधित करते हुए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से हटाने के साथ ही उपरोक्त प्रोफेसर के विरुद्ध उचित कार्यवाही करने की भी मांग की है। इस मौके पर ज्ञापन भेजने वालो में बारह राणा स्मारक समिति अध्यक्ष श्रीपाल राणा, रामकिशोर राणा, दिनेश राणा, सुरेश राणा, सुनील राणा, मुकेश राणा, अभिषेक राणा, सरस्वती राणा, यशोदा राणा, पूनम राणा, दुर्गा राणा, माधवी राणा, सुशील राणा आदि मौजूद रहे।