गर्भवती की मौत से मचा हड़कंप – सरकारी डॉक्टर पर निजी अस्पताल में ऑपरेशन का गंभीर आरोप, जांच में उजागर हुई अस्पताल की अव्यवस्थाएं, पंजीकरण निरस्त कर ₹75,000 का चालान, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप।
27 सितंबर, 2025
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सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) नगर की स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही और नियमों की अनदेखी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था बल्कि पूरे जिले के प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 24 वर्षीय गर्भवती काजल कौर पत्नी मंजीत सिंह, जो 36 सप्ताह की गर्भवती थी, को 21 जुलाई 2025 की रात प्रसव पीड़ा के कारण उप-जिला चिकित्सालय सितारगंज में भर्ती कराया गया था। डॉ. नेहा सिद्दीकी द्वारा मरीज का परीक्षण किया गया और पाया गया कि प्रसव पीड़ा बढ़ रही है, लेकिन अस्पताल में आवश्यक संसाधनों की भारी कमी थी। चिकित्सालय में केवल दो ऑटोक्लेव इंस्ट्रूमेंट उपलब्ध थे, जिनसे पहले ही दो अन्य ऑपरेशन किए जा चुके थे, साथ ही नर्सिंग स्टाफ व विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी सामने आई।मरीज को रात साढ़े आठ बजे भर्ती करने के बाद लगभग पांच घंटे तक अस्पताल में रोके रखा गया और अंततः देर रात 1:40 बजे आस्था मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल सितारगंज रेफर कर दिया गया। गंभीर आरोप है कि सरकारी सेवा में रहते हुए भी डॉ. नेहा सिद्दीकी स्वयं निजी अस्पताल पहुंचीं और वहीं मरीज का ऑपरेशन किया। जबकि जांच में सामने आया कि निजी अस्पताल में न तो गायनोकोलॉजिस्ट व बाल रोग विशेषज्ञ थे और न ही आवश्यक सुविधाएं, बल्कि पंजीकरणहीन पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों का इलाज कर रहा था। हालत बिगड़ने पर अगले ही दिन मरीज को फिर से रेफर कर दिया गया और 12 दिन तक संघर्ष करने के बाद देहरादून के जोलीग्रांट अस्पताल में काजल की मौत हो गई।मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें गुमराह कर पहले नार्मल डिलीवरी की बात कही गई और बाद में अचानक निजी अस्पताल भेज दिया गया। वहीं, जांच समिति की रिपोर्ट ने भी अस्पताल की अव्यवस्था, नियमों की अनदेखी और सरकारी डॉक्टर द्वारा निजी अस्पताल में ऑपरेशन करने की पुष्टि की है। समिति ने आस्था अस्पताल का वैधानिक पंजीकरण निरस्त करने और ₹75,000 का चालान करने की संस्तुति की है, साथ ही सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव को तत्काल ओटी व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं।यह प्रकरण न केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर करता है, बल्कि सरकारी डॉक्टरों और निजी अस्पतालों के बीच संभावित गठजोड़ पर भी गंभीर सवाल उठाता है। जिले में चर्चा है कि यदि समय रहते मरीज को जिला अस्पताल या किसी हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। अब यह मामला स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचाने के साथ-साथ आम जनता के बीच आक्रोश और अविश्वास की स्थिति भी पैदा कर रहा है।इधर परिजनों की तहरीर पर पुलिस भी मामले की जांच कर रही है।