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देशभर में बढ़ते जातीय उत्पीड़न पर उबाल — अनुसूचित जाति समाज ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग, कहा- मनुवादी सोच के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

देशभर में बढ़ते जातीय उत्पीड़न पर उबाल — अनुसूचित जाति समाज ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग, कहा- मनुवादी सोच के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) देशभर में तेजी से बढ़ रही जातीय उत्पीड़न की घटनाओं से आक्रोशित अनुसूचित जाति समाज के लोगों ने महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सितारगंज रविन्द्र कुमार जुवाठा सौपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि देश में अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज पर हो रहे अत्याचार अब भयावह स्थिति में पहुंच चुके हैं, जिससे संविधान और लोकतंत्र की मूल भावना को गहरी ठेस लग रही है। समाज के लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो देश की सामाजिक एकता और सद्भाव पर गंभीर असर पड़ेगा।ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के विरुद्ध सोशल मीडिया पर की गई अभद्र टिप्पणी, हरियाणा कैडर के आईपीएस आईजी वाई. पूरण कुमार की जातीय उत्पीड़न से दुखी होकर की गई आत्महत्या और उत्तर प्रदेश के रायबरेली में मजदूर हरिओम वाल्मीकि की पीट-पीटकर की गई हत्या जैसे मामलों को गिनाते हुए इन्हें राष्ट्र की आत्मा पर प्रहार बताया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मांग की है कि दोषियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक के लिए ठोस नीति बनाई जाए।समाज के नेताओं ने कहा कि कुछ संगठनों द्वारा मनुवादी विचारधारा के प्रचार और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के विरुद्ध चलाए जा रहे दुष्प्रचार से देश में जातीय तनाव बढ़ रहा है। यह कृत्य न केवल संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है बल्कि राष्ट्र विरोधी साजिश के दायरे में आता है। उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई करे, जिससे देश में सौहार्द, समानता और न्याय की भावना बनी रहे।यह ज्ञापन बार एसोसिएशन सितारगंज के अध्यक्ष दयानंद सिंह, , वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश कुमार,विजय राव, मेघनाथ, राजकुमार बाल्मीकि , हरीराम, कैलाश कुमार,राकेश कुमार,अविनाश बाल्मीकि,सतीश सहित अनुसूचित जाति समाज के प्रतिनिधियों द्वारा राष्ट्रपति को भेजा गया। सभी ने एक स्वर में कहा कि संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए अब निर्णायक कदम उठाना समय की मांग है।

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