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वन औषधियां बनेंगी शक्ति फार्म की पहचान, क्षेत्र के आर्थिक-सामाजिक विकास का बनेगा नया मॉडल : डॉ. धीरज पाराशरी।

वन औषधियां बनेंगी शक्ति फार्म की पहचान, क्षेत्र के आर्थिक-सामाजिक विकास का बनेगा नया मॉडल : डॉ. धीरज पाराशरी।


सितारगंज : (चरनसिंह सरारी)। प्राकृतिक संपदाओं से परिपूर्ण शक्ति फार्म अब उत्तराखंड के आर्थिक और सामाजिक विकास की नई मिसाल बन सकता है। ग्रीनवुड पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर (एकेडमिक्स) एवं ग्रीन वर्ल्ड स्कूल के विजिटिंग डायरेक्टर, सर्टिफाइड करियर काउंसलर और मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. धीरज पाराशरी ने कहा कि शक्ति फार्म के विस्तृत वनों में प्रकृति ने असीम संपदा के रूप में दुर्लभ वन औषधियां प्रदान की हैं, जो न केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपयोगी हैं बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि वनों से प्राप्त औषधीय पौधे, इमारती लकड़ी और अन्य संसाधन शक्ति फार्म की रीढ़ हैं। अगर इनका वैज्ञानिक और योजनाबद्ध उपयोग किया जाए, तो यह क्षेत्र जल्द ही उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक औषधीय हब के रूप में उभर सकता है।डॉ. पाराशरी ने कहा कि आज विश्वभर में लोग एलोपैथिक दवाओं के विकल्प के रूप में आयुर्वेद और प्राकृतिक औषधियों की ओर लौट रहे हैं। ऐसे समय में शक्ति फार्म जैसे प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र के पास अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को यहां एक ‘वन औषधि अनुसंधान संस्थान’ की स्थापना करनी चाहिए, जिससे इन औषधियों पर शोध, संरक्षण और व्यावसायिक उपयोग की दिशा में ठोस कार्य हो सके। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इन संसाधनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रस्तुत करती है, तो विदेशी मुद्रा में वृद्धि, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और क्षेत्र की प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय सुधार होगा।डॉ. पाराशरी ने आगे कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल कंपनियों को यहां संस्थान खोलने की अनुमति दी जाए, तो इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर कौशल विकास और रोजगार भी सृजित होंगे। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सरकार को इन वन औषधियों की सुरक्षा, शोध और मार्केटिंग रणनीति पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि इनका दुरुपयोग न हो और स्थानीय समुदाय को इसका सीधा लाभ मिल सके।अंत में उन्होंने कहा कि शक्ति फार्म की भौगोलिक स्थिति, हरियाली और जैव विविधता इसे औषधीय और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। यदि यहां के वनों और औषधीय पौधों का सतत उपयोग, संरक्षण और प्रचार योजनाबद्ध तरीके से किया जाए, तो शक्ति फार्म निकट भविष्य में एक विकसित, आत्मनिर्भर और हरित क्षेत्र के रूप में देशभर में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।

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