मां नंदा–सुनंदा के डोले संग रंगयात्रा, लोकनृत्य-लोकगीतों से गूंजा सितारगंज।तीन दिवसीय उत्तरायणी कौतिक का भव्य और ऐतिहासिक शुभारंभ।
13 जनवरी, 2026
Edit
सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) उत्तरांचल सांस्कृतिक विकास समिति के तत्वावधान में उत्तरायणी कौतिक घुघूती त्यार के अवसर पर रविवार को सितारगंज नगर में सांस्कृतिक आस्था, परंपरा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब मां नंदा-सुनंदा के दिव्य डोले के साथ भव्य व आकर्षक रंगयात्रा निकाली गई। रंग-बिरंगी झांकियों, पारंपरिक वेशभूषा और लोककलाओं से सजी यह यात्रा पर्वतीय रामलीला परिसर सिडकुल रोड से प्रारंभ होकर जेल रोड व खटीमा रोड होते हुए रामलीला मैदान पहुंची, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा। उत्तरायणी कौतिक का शुभारंभ उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी व सामाजिक कार्यकर्ता फकीर सिंह कन्याल ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट ने की। यात्रा के दौरान उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हुए छोलिया नृत्य, राधा-कृष्ण नृत्य, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और आकर्षक झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘लाली हो लाली होसिया’, ‘पधानी लाली तील धारो बोला’ और ‘मोहना तू बैठि रैछि मेर दिल मां’ जैसे गीतों पर दर्शक देर तक झूमते रहे। संस्कार सांस्कृतिक एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के कलाकारों के साथ बाल छोलिया दल की मनमोहक प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। समिति अध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तरायणी कौतिक हमारी सांस्कृतिक पहचान और धरोहर है, जिसे जीवंत रखने के लिए श्री रामलीला ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय मेले के माध्यम से लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को सशक्त रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।