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सितारगंज सिडकुल में जीएसटी का बड़ा छापा: 150 करोड़ से ज्यादा की कर चोरी उजागर, 19.83 करोड़ तुरंत वसूले, 76 करोड़ का स्टॉक सीज।

सितारगंज सिडकुल में जीएसटी का बड़ा छापा: 150 करोड़ से ज्यादा की कर चोरी उजागर, 19.83 करोड़ तुरंत वसूले, 76 करोड़ का स्टॉक सीज।

सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) सिडकुल में जीएसटी विभाग की विशेष जांच शाखा (एसआईबी) ने ट्रांसफॉर्मर निर्माण और उससे जुड़ी सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी औद्योगिक कंपनी समूह पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 150 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का सनसनीखेज खुलासा किया है और मौके पर ही 19.83 करोड़ रुपये का जीएसटी वसूल लिया। जांच में सामने आया कि यह समूह 500 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली कई कंपनियों का नेटवर्क संचालित कर रहा था, जबकि कागजों में कारोबार ‘निल’ दिखाकर टैक्स देनदारी से बचा जा रहा था। छापेमारी के दौरान टीम ने बिक्री, स्टॉक, माल और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त किए तथा फैक्ट्री में रखे लगभग 76 करोड़ रुपये मूल्य के स्टॉक को सीज कर दिया। अधिकारियों के अनुसार कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों से लगातार ‘निल’ रिटर्न दाखिल कर कर चोरी की, जबकि कुछ वर्ष पहले एनसीएलटी के जरिए डिमर्जर कर पुरानी कंपनी में जेनसेट निर्माण व मेंटेनेंस बंद दिखाकर वही काम नई कंपनी को सौंप दिया गया। इसके बावजूद पुरानी कंपनी तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दमन-दीव सहित कई राज्यों से कच्चा व तैयार माल मंगाती रही और पिछले छह–सात महीनों में ही 150 करोड़ रुपये से अधिक का माल खरीदने के बावजूद जीएसटी पोर्टल पर बिक्री शून्य दिखाकर टैक्स से बचने का खेल चलता रहा। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि बिजली वितरण निगमों और ऊर्जा विभागों को टेंडर के जरिए सप्लाई कर कागजों में कीमतें बढ़ाकर दिखाने और फैक्ट्री से फर्जी बिक्री बिल जारी करने का मामला सामने आया है, जबकि बैंक खातों में भारी लेनदेन दर्ज हैं। दक्षिण भारत से माल सितारगंज लाकर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश भेजे जाने का नेटवर्क भी पकड़ा गया। विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस और आरएफआईडी तकनीक की मदद से करीब एक महीने तक निगरानी रखकर इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया। 32 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई का संचालन जीएसटी आयुक्त सोनिका सिंह (आईएएस) के नेतृत्व में तथा संयुक्त आयुक्त (एसआईबी) रोशन लाल और जोनल अपर आयुक्त राकेश वर्मा के मार्गदर्शन में किया गया। विभाग का कहना है कि जांच अभी जारी है और जल्द ही कंपनी समूह तथा उसके निदेशकों के नाम सार्वजनिक किए जा सकते हैं।

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