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वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर पशुपालन व खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, बिडौरा में आयोजित कृषक-वैज्ञानिक संगोष्ठी में उमड़ा उत्साह।

वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर पशुपालन व खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, बिडौरा में आयोजित कृषक-वैज्ञानिक संगोष्ठी में उमड़ा उत्साह।

सितारगंज/नानकमत्ता:(चरन सिंह सरारी) ग्राम बिडौरा में उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बायोटेक) पंतनगर के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक संगोष्ठी ज्ञान, संवाद और उत्साह का केंद्र बनी, जिसमें क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान, पशुपालक और ग्रामीणों ने भाग लेकर आधुनिक खेती व पशुपालन की नवीन जानकारियां प्राप्त कीं। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत भूमि पूजन के साथ किया गया। मुख्य अतिथि निदेशक बायोटेक डॉ. संजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन और उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आर्थिकी को मजबूत बना सकते हैं तथा उच्च गुणवत्ता वाले बीज, बेहतर नस्लों और आधुनिक प्रबंधन से उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है। उन्होंने किसानों को अनुसंधान आधारित तकनीकों को अपनाने और कृषि को व्यवसायिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि समाजसेवी श्रीपाल राणा ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और आधुनिक तकनीक से जुड़कर वे अपनी मेहनत का बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। संगोष्ठी में विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. शिवप्रसाद मौर्य ने पशुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए गाय-भैंस की उन्नत नस्लों के चयन, दूध की गुणवत्ता बढ़ाने, पशुओं के गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं, बाँझपन के कारणों और उनके समाधान पर विस्तार से प्रकाश डाला, साथ ही वैज्ञानिक पशु प्रजनन पद्धतियों तथा पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपाय भी बताए। डॉ. एस.के. सिंह ने पशुपालन की आधुनिक तकनीकों, कृत्रिम गर्भाधान तथा दूध उत्पादन बढ़ाने के प्रभावी तरीकों की जानकारी देकर किसानों को जागरूक किया। इस अवसर पर प्रगतिशील किसान सुरेश राणा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि नई तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। वैज्ञानिक डॉ. मणिंद्र मोहन शर्मा ने उन्नत खेती के लिए मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, फसल की आवश्यकता के अनुसार जल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि प्रणाली पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जबकि वैज्ञानिक सहायक अनुज कुमार ने उद्यानिकी फसलों के आधुनिक तरीकों, पौधरोपण और देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों को मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया समझाई गई और खेतों की उर्वरता जानने के लिए मिट्टी के नमूने भी एकत्र किए गए, जिससे किसानों को भविष्य में वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने में सहायता मिल सकेगी। संगोष्ठी के दौरान किसानों ने वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं भी साझा कीं, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान बताया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान उषावती राणा, पवन सिंह, शेर सिंह, सुरेश राणा सहित बड़ी संख्या में किसान व पशुपालक मौजूद रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

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