“अब पंचायतों की अनदेखी नहीं चलेगी” : प्रदेशभर में गरजे जिला पंचायत सदस्य, मानदेय बढ़ाने से लेकर पंचायत निधि तक उठीं 8 बड़ी मांगें।
11 मई, 2026
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देहरादून/सितारगंज:(चरन सिंह सरारी) प्रदेश जिला पंचायत सदस्य संगठन उत्तराखंड के बैनर तले सोमवार को पूरे उत्तराखंड में जिला पंचायत सदस्यों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन किया। ऊधम सिंह नगर में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या एवं प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल एडवोकेट के नेतृत्व में बड़ी संख्या में जिला पंचायत सदस्य एकत्र हुए और मुख्य विकास अधिकारी देवेश शासनी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। इस दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि ग्राम स्तर पर विकास योजनाओं का भार जिला पंचायत सदस्यों पर है, लेकिन अधिकार और संसाधनों की भारी कमी के कारण जनहित के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ज्ञापन में उत्तराखंड में जिला योजना समिति के चुनाव शीघ्र कराने, वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिला नियोजन समिति से पारित प्रस्तावों की पुनर्समीक्षा, पंचायतों में आरक्षण परिवर्तन की अवधि 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष करने, 73वें संविधान संशोधन के तहत 29 विषय पंचायतों को हस्तांतरित करने, पंचायत कल्याण कोष की स्थापना कर किसी सदस्य की अप्रिय मृत्यु या हादसे की स्थिति में परिवार को 10 लाख रुपये सहायता देने, जिला योजना में कोटेशन कार्यों की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर 5 लाख करने, जिला पंचायत सदस्यों का मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने तथा विधायक निधि की तर्ज पर प्रत्येक जिला पंचायत सदस्य को पंचायत निधि उपलब्ध कराने जैसी 8 प्रमुख मांगें रखी गईं। संगठन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक माह के भीतर मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय की शरण भी ली जाएगी। ज्ञापन कार्यक्रम में नईम, रीता, मधु राणा, प्रेम, गुरदास कालरा, चरणजीत सिंह चन्नी, सीमा कौर, मोहम्मद फुरकान, सूरज नारायण, भावना, सिल्की, सुषमा, संगीता, अनिमा, आशा, हीरा, मोहम्मद हसन सहित बड़ी संख्या में जिला पंचायत सदस्य मौजूद रहे। वहीं उत्तरकाशी में दीपेंद्र कोहली, पिथौरागढ़ में पंकज सिंह बोरा, टिहरी में राजेंद्र सिंह रांगड़, रुद्रप्रयाग में संपन्न नेगी और अल्मोड़ा में प्रकाश के नेतृत्व में भी मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर पंचायतों को अधिक अधिकार और संसाधन देने की मांग उठाई गई।