पंचायतों में उपप्रधानों के अधिकार और भागीदारी की उठी बुलंद आवाज,जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में उपप्रधान संगठन ने बीडीओ को सौंपा मांगपत्र, पंचायत कार्यालय में बैठने की व्यवस्था से लेकर विकास कार्यों की कार्ययोजना और भुगतान प्रक्रिया में सहभागिता की मांग।
31 अगस्त, 2026
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उपप्रधान बोले—निर्णय प्रक्रिया में मिले उचित स्थान, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जरूरी है सक्रिय भागीदारी।
सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) ग्राम पंचायतों के विकास और पंचायत व्यवस्था में उपप्रधानों की भूमिका को प्रभावी बनाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। उपप्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में क्षेत्र के उपप्रधानों ने खंड विकास अधिकारी, विकास खंड सितारगंज को मांगपत्र सौंपकर पंचायत के कामकाज में उनकी नियमानुसार सहभागिता सुनिश्चित किए जाने की मांग उठाई। उपप्रधानों ने कहा कि ग्राम पंचायतों के संचालन में उपप्रधान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन कई बार पंचायत के विकास कार्यों, योजनाओं और कार्ययोजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में उनकी अपेक्षित भागीदारी नहीं हो पाती। इससे न केवल उनकी भूमिका सीमित होती है, बल्कि पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। संगठन ने मांग की कि प्रत्येक ग्राम पंचायत कार्यालय में उपप्रधान के बैठने के लिए उचित एवं नियमित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह पंचायत से जुड़े कार्यों में सक्रिय रूप से सहयोग कर सकें और ग्रामीणों की समस्याओं को पंचायत स्तर पर प्रभावी ढंग से उठा सकें। वार्षिक कार्ययोजना में शामिल हों उपप्रधानों के सुझाव मांगपत्र में विशेष रूप से कहा गया कि ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्ययोजना तैयार करते समय उपप्रधानों से विधिवत विचार-विमर्श किया जाए और उनके सुझावों एवं प्रस्तावों को नियमानुसार कार्ययोजना में स्थान दिया जाए। पंचायत में प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी उपप्रधानों को समय से उपलब्ध कराने के साथ ही कार्यों के चयन, प्राथमिकता निर्धारण और विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा में भी उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग की गई। उपप्रधानों का कहना है कि क्षेत्र की जमीनी समस्याओं की जानकारी होने के कारण उनकी भागीदारी से विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी एवं जनोपयोगी बनाया जा सकता है। भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता पर विशेष जोर उपप्रधान संगठन ने पंचायत के विकास कार्यों से संबंधित भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी अपनी मांग स्पष्ट की है। संगठन का कहना है कि विकास कार्यों के भुगतान से जुड़ी आवश्यक जानकारी उपप्रधानों को नियमानुसार उपलब्ध कराई जाए तथा जहां नियमों के तहत उनकी सहमति अथवा अनुमोदन आवश्यक हो, वहां प्रक्रिया में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाए। इससे पंचायत स्तर पर वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही पंचायत की महत्वपूर्ण बैठकों, विकास योजनाओं, प्रस्तावित कार्यों और अन्य गतिविधियों की सूचना उपप्रधानों को समय से उपलब्ध कराने की मांग की गई है। वैधानिक अधिकारों के अनुरूप मिले जिम्मेदारी उपप्रधानों ने कहा कि उन्हें उनके पद से जुड़े वैधानिक अधिकारों और दायित्वों के अनुरूप पंचायत के कार्यों में उचित अवसर मिलना चाहिए। पंचायत से संबंधित आवश्यक अभिलेखों और विकास कार्यों की जानकारी भी नियमानुसार उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उपप्रधान अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन कर सकें। उन्होंने बीडीओ से मांगपत्र में उठाए गए सभी बिंदुओं पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने तथा संबंधित ग्राम पंचायतों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया। उपप्रधानों ने कहा कि पंचायत लोकतंत्र की सबसे निचली और महत्वपूर्ण इकाई है। ऐसे में पंचायत के प्रत्येक जिम्मेदार पदाधिकारी की सहभागिता सुनिश्चित होने से विकास कार्यों की निगरानी बेहतर होगी और ग्रामीणों के हित में योजनाओं का अधिक प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो सकेगा। इस दौरान शेर सिंह, निर्मल सिंह, जसवंत सिंह, बलबीर सिंह, नीरज सिंह, कमलदीप सिंह, नंदलाल, कृष्ण सिंह, मो. नवाजिश, राशिद खान, जसवंत सिंह, परमजीत सिंह, बख्शीश सिंह, अरविंद कुमार, बिमला देवी, रेनू, भगवान सिंह, विश्वजीत विश्वास, संजय विश्वास, नीरज देवी, लखविंदर कौर, सुनीता देवी, धर्मदेव, परविंदर सिंह सहित बड़ी संख्या में उपप्रधान मौजूद रहे।