"ऑपरेशन मुक्ति” के सहारे चमके सितारे।
25 मार्च, 2023
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काशीपुर:(चरनसिंह सरारी) पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड अशोक कुमार की पहल पर प्रदेश भर में 1 जनवरी 2023 से 02 माह के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन मुक्ति” अभियान के तहत जनपद ऊधमसिहंनगर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजुनाथ टी०सी० के दिशा निर्देशन एवं पुलिस उपाधीक्षक ऑपरेशन श्रीमती अनुषा बडोला के पर्यवेक्षण में ऑपरेशन मुक्ति टीमें बनाकर बाल भिक्षावृत्ती व बालश्रम में लिप्त बच्चो को चिन्हीकरण कर उनका दाखिला स्कूल में कराया जा रहा है, साथ ही पूर्व मे “ऑपरेशन मुक्ति” अभियान के तहत कराये गये दाखिलो के सत्यापन की कार्यवाही की जा रही है । काशीपुर सर्किल में नियुक्त द्वितीय टीम उ०नि० जावेद मलिक, का० गिरिश काण्डपाल, का० दयालूराम, का० महेन्द्र, म०क० किरन मेहरा द्वारा सत्यापन की कार्यवाही के दौरान ढूढ निकाले चमकते सितारे ।
कोमल पुत्री श्याम सिहं , गौरव पुत्र श्याम सिहं निवासीगण सुभाषनगर काशीपुर ने लाकडाउन के कारण स्कूल जाना बन्द कर दिया था चूँकि बच्चो के माता पिता लाकडाउन के चलते प्राईवेट स्कूल की फिस भरने मे सक्षम नही थे । 2021 में “ऑपरेशन मुक्ति” के दौरान उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा इन बच्चो से सम्पर्क कर इनकी परेशानी को देखते हुए पुलिस के सहयोग से उक्त बच्चो का दाखिला रा०प्रा0
०वि० रेलवे काशीपुर में कराया गया था । शैलेस कुमार ने बच्चो की पूर्ण जिम्मेदारी लेते हुए बच्चो को गुणवत्ता की शिक्षा देने के साथ- साथ बच्चो की प्रतिभा को भी निखारने का काम किया । जिसके चलते कोमल द्वारा कक्षा-3 , 91.47 प्रतिशत अंको के साथ व गौरव ने कक्षा-4, 71.87 प्रतिशत अंको के साथ उत्तीर्ण की । इसके अलावा दोनो बच्चे प्रतिभावान है, जहा कोमल जूडो कराटे का हुनर रखती है वही गौरव क्रिकेट व खो-खो खेल में प्रतिभाशाली है । कोमल ने नेशनल कराटे चैम्पियनशिप हल्द्वानी 2023 में सिल्वर मेडल जीता, वही गौरव ने खो-खो स्टेट चैम्पियनशिप में दित्तिय स्थान व जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया । आप सभी से मेरा निवेदन है आओ मिलकर प्रण ले कि बच्चो के हाथो में भिक्षा नहीं शिक्षा देंगे । जिस प्रकार से रा०प्रा०वि० रेलवे काशीपुर के प्रधानाध्यापक शैलेश कुमार द्वारा मेहनत ओऱ लगन से प्राईमरी स्कूल को स्पोर्टस एकडेमी में बदलकर निस्वार्थ भाव से बच्चो के भविष्य को सुनहरे करने में अपना योगदान दिया जा रहा है , क्यू ना हम ओऱ आप भी मिलकर इस मुहिम को आगे बढाये । हमारे व हमारे आस-पास के बच्चो की शिक्षा बेहतर होगी तो वो आने वाले समय में अच्छे आचरण व प्रतिभाशाली यूथ बनकर देश की तरक्की में अपना योगदान देंगे ।
निस्वार्थ भावना के प्रतीक है - “शैलेश कुमार”।
काशीपुर: क्या कोई प्राथमिक विधालय प्राईवेट स्कूल से भी बेहतर सुविधाये उपलब्ध करा सकता है इसका उत्तर है हा । परन्तू ये सुविधाये भौतिक नही है , ये सुविधाये है प्रतिभाशाली बनने की । आपको बताये जहाँ करौना काल के समय लोगो का जीना मुश्किल हो चला था , घर से बाहर जाना , नौकरी करना यहा तक की बच्चो का स्कूल जाना भी बन्द हो गया था । आम जन – जीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया था । परन्तू एक व्यक्ति ऐसा भी था इस जिसने बेजान वक्त को एक खूबसूरत मोड दिया ओऱ प्राईमरी स्कूल का डेवलेप्मेन्ट करने के आलावा इस व्यक्ति ने स्कूल के साथ ही बना दी बच्चो के लिए खेल एकडेमी । जहा एक तरफ स्कूल का सून्दर वातावरण , साफ-सफाई नजर आती है वही पर टीचर व बच्चो द्वारा हाथो से बनाई कलाकारी दीवारो पर लगी देखी जा सकती है । हम बात कर रहे है प्राईमरी स्कूल रेलवे टाण्डा उज्जैन काशीपुर की जहा के प्रधानाध्यापक शैलेश कुमार ने बदल दी प्राईमरी स्कूल की तस्वीर । शैलेश कुमार द्वारा स्कूल की क्लास को बच्चो को ध्यान में रखते हुए मेन्टेन किया गया है ताकि दीवारे भी पढाई का हिस्सा बनी रही । व पढने वाले बच्चो के लिए अलग से नवोदय विधालय की तैयारी के लिए बनाई गयी अलग से हाई स्टेन्डर्ड क्लास । पढाई के साथ – साथ स्कूल के बगल में बडी मेहनत से बच्चो के स्पोर्टस खेलने के लिए एक मिनी एकडमी को बनाया गया है । जहाँ पर बच्चे खो-खो, हैण्ड बाल, क्रिकेट, बाक्सिगं, टेबल टेनिस, मुक्केबाजी, ताई कमान्डो, जूडे –कराटे आदि खेलो को खेलते –खेलते, सीख रहे है । लाकडाऊन के दौरान खाली समय में प्रधानाध्यापक शैलेश कुमार ने अपना पूरा समय ओऱ समर्पण इस स्कूल में लगा दिया ताकि गरीब बच्चो की प्रतिभा में किसी कमी से कोई रुकावट ना आये । बच्चो के लिए स्पोर्टस का सामान , किट , कपडे, ट्रेक सूट, बल्ले , गेंद, नेट, टेनिस टेबल आदि पूर्ण इन्तजाम शैलेश कुमार ने सरकारी धन व समाजिक लोगो की सहायता से किया है । बात यहां पर काम से ज्यादा निस्वार्थ भाव की है , के आखिर शैलेश कुमार ने ऐसा किया क्यू है ? आपको बता दें कि उक्त सरकारी स्कूल मे ज्यादातर गरीब परिवार के बच्चे पढते है , कुछ ऐसे भी है जिनके माता –पिता अब इस दुनिया में नही है । ये वो बच्चे है , जो किसी खेल में रुचि होने के बावजूद खर्च के लिए पैसे ना होने के कारण अपनी प्रतिभा को आगे नही बढा पाते । बस उसी प्रतिभा को आगे लाने के लिए शैलेश कुमार ने निस्वार्थ भाव से आगे आकर इन बच्चो को ऐसा मंच तैयार करके दिया जिससे ये बच्चे बेहतरीन तरीके से सीख रहे है । और इस स्कूल के बच्चे जिला एवम राज्य स्तर की प्रतियोगिता मे हर वर्ष दर्जनो मेडल लेकर आ रहे है । कुछ बच्चे नेशनल चैंपियनशिप मे भी मेडल लेकर आये है । धन्य है ऐसा अध्यापक जो स्वार्थ की इस दुनिया मे निस्वार्थ भाव से बच्चो को अपना परिवार मानकर उनके उज्जवल भविष्य के लिए अपना बेशकीमती समय दे रहा है । ये भावना शैलेश सर मे जागी उनके स्पोर्टस के प्रति झुकाव से, चूँकी शैलेश सर अपने समय मे एक अच्छे क्रिकेटर ओऱ एथलीट रहे है । उनके पास पी)टी०आई० –सी०पी०डी० की ड्रिग्री है । कोई व्यक्ति तो है जो निस्वार्थ है क्या आप ओऱ हम है , क्या हम अपने स्वार्थ से आगे निकलकर किसी की प्रतिभा को दबने से बचायेगें । जहा एक तरफ लोग छोटे-छोटे बच्चो से मजदूरी , कूड़ा बिनवाना , बर्तन साफ करवाना , चाय के झूठे बर्तन धुलवाना , भीख मंगवाना आदि कार्य करा रहे है । क्या उनको अधिकार है बच्चो के भविष्य से खेलने का , क्या हम लोग बच्चो को उनके पढाई के अधिकार से वंचित रहने देंगे । उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा चलाई जा रही मुहिम “ऑपरेशन मुक्ति” में सभी योगदान दें । बच्चो को शिक्षा दे , भिक्षा नही ।