स्कूली वाहनों में विद्यार्थियों की सुरक्षा भगवान भरोसे! आरटीआई में बड़ा खुलासा—शासनादेश, कोर्ट आदेश और नियम सब कागजों तक सीमित ।
04 अक्टूबर, 2025
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सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरटीआई के 34 पन्नों में ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने न केवल स्कूलों की व्यवस्थाओं, बल्कि परिवहन और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जानकारी के अनुसार, सितारगंज क्षेत्र के स्कूलों में चलने वाली बसें वैनें नियम-कायदों को ताक पर रखकर “चलती तिजोरियां” बन चुकी हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए शासनादेशों और न्यायालय के आदेशों की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही हैं। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि उप संभागीय परिवहन कार्यालय रुद्रपुर ने शासनादेश और कोर्ट के निर्देश होने के बावजूद महिला परिचालक नियुक्ति से संबंधित जानकारी देने से इनकार कर दिया, जबकि उसी दस्तावेज में साफ लिखा था कि हर स्कूली बस में महिला परिचालक की नियुक्ति अनिवार्य है। इसका साफ मतलब है कि विभाग जानबूझकर ऐसे गंभीर मुद्दे से बच रहा है।
आरटीआई के दस्तावेज बताते हैं कि सितारगंज क्षेत्र के 11 पंजीकृत स्कूलों की करीब 31 बसें चल रही हैं, लेकिन इनमें से किसी में भी महिला परिचालक नहीं है। हैरानी की बात यह है कि इन बसों की फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र, सीसीटीवी कैमरा, स्पीड गवर्नर और फायर सेफ्टी से जुड़ी कोई जानकारी परिवहन विभाग के पास मौजूद नहीं है। कई बसों पर चालान तो हुए, पर कार्रवाई सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गई, और वही वाहन अब भी बच्चों को लेकर सड़कों पर मौत को दावत दे रहे हैं। अग्निशमन विभाग ने भी स्वीकार किया है कि उनके पास स्कूली बसों की फायर सेफ्टी रिपोर्ट तक नहीं है। यानी किसी भी हादसे की स्थिति में न आग बुझाने की व्यवस्था है और न बच्चों के सुरक्षित निकलने की कोई गारंटी।मामले का आर्थिक पहलू भी कम चौंकाने वाला नहीं है। स्कूल प्रबंधन मनमाने ढंग से बस किराया वसूल रहे हैं, जबकि वास्तविक किराया निर्धारण और अनुमोदन का कोई रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं है। परिवहन विभाग की यह चुप्पी और निष्क्रियता प्रशासनिक मिलीभगत का संकेत दे रही है। अभिभावकों ने पूरे प्रकरण को “आपराधिक लापरवाही” और “भ्रष्टाचार का जाल” करार देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि “जब शासनादेश मौजूद हैं, तो बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसकी छत्रछाया में हो रहा है?” सितारगंज क्षेत्र में स्कूली वाहनों में सुरक्षा के नाम पर जो खेल चल रहा है, उसने अभिभावकों को भयभीत कर दिया है। आज हालात यह हैं कि बच्चों की सुरक्षा अब भगवान भरोसे है और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।