लखन को हटाने से उबाल पर वार्ड नंबर 8, सफाई व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप, नगर पालिका के खिलाफ आंदोलन के संकेत।
15 दिसंबर, 2025
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सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) नगर पालिका परिषद सितारगंज के वार्ड नंबर 8 में लंबे समय से पूरी ईमानदारी, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ सफाई कार्य कर रहे कर्मचारी लखन को हटाए जाने के बाद हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं; गुस्साए वार्डवासियों ने नगर पालिका अध्यक्ष एवं संबंधित सभासद को सामूहिक ज्ञापन सौंपते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि लखन के कार्यकाल में वार्ड पूरी तरह स्वच्छ, नालियां साफ और कूड़ा समय से उठाया जाता था, लेकिन उनके हटते ही सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है, जिससे गंदगी, बदबू और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है; वार्डवासियों ने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस कारण के एक कर्मठ और लोकप्रिय सफाई कर्मचारी को हटाना सीधे तौर पर जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही श्री लखन को पुनः वार्ड नंबर 8 में तैनात नहीं किया गया तो मजबूरन नगर पालिका के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।ज्ञापन देने वाले वार्डवासियों में के.पी. शर्मा,प्रेम शंकर, मुकेश, तुषार, महेंद्र सिंह, रवीना,गुरदयाल सिंह,परमजीत कौर,जगदीप सिंह,अनिल कुमार आदि शामिल रहे।
नगर पालिका की नाकामी से शर्मसार व्यवस्था, राष्ट्रपति सम्मानित के.पी. शुक्ला खुद उतरे नालियों में, वार्ड 8 में फूटा जनआक्रोश।
सितारगंज: नगर पालिका परिषद सितारगंज के वार्ड नंबर 8 में सफाई व्यवस्था की बदहाली उस समय सार्वजनिक रूप से उजागर हो गई जब राष्ट्रपति से सम्मानित के.पी. शुक्ला को मजबूरन स्वयं नालियों की सफाई करनी पड़ी। नगर पालिका द्वारा वर्षों से कार्यरत पुराने सफाई कर्मचारी को हटाकर ऐसे कर्मचारी की तैनाती की गई, जिस पर पहले से ही गंभीर शिकायतें दर्ज बताई जा रही हैं। इससे आक्रोशित वार्डवासियों ने एकमत होकर उक्त कर्मचारी से कार्य न कराने का फैसला लिया और साफ शब्दों में कहा कि यदि नगर पालिका जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ है तो वे अपने वार्ड की सफाई स्वयं करेंगे। इसी विरोध स्वरूप वार्डवासियों के साथ सभासद पति भी मैदान में उतरे और नालियों की सफाई की, जिसकी अगुवाई राष्ट्रपति सम्मानित के.पी. शुक्ला जी ने की। यह घटना नगर पालिका की कार्यशैली पर करारा तमाचा है और आम जनता में यह सवाल छोड़ गई है कि जब राष्ट्रपति सम्मानित नागरिक को झाड़ू उठानी पड़े, तो आम आदमी की सुध कौन लेगा?