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57 वाहिनी सशस्त्र सीमा बल सितारगंज में खादी मेले की भव्य गूंज, जवानों व परिवारों ने अपनाया स्वदेशी संकल्प।

57 वाहिनी सशस्त्र सीमा बल सितारगंज में खादी मेले की भव्य गूंज, जवानों व परिवारों ने अपनाया स्वदेशी संकल्प।




सितारगंज:(चरनसिंह सरारी) 57 वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, सितारगंज परिसर में कमांडेंट मनोहर लाल के कुशल नेतृत्व में आयोजित खादी मेला स्वदेशी भावना और आत्मनिर्भर भारत के संदेश का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा, जहां खादी के ऐतिहासिक महत्व से लेकर आधुनिक युग में उसकी उपयोगिता पर प्रभावशाली प्रकाश डाला गया। मेले के शुभारंभ अवसर पर कमांडेंट ने कहा कि खादी केवल पहनने का वस्त्र नहीं बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम, आत्मसम्मान और स्वावलंबन की पहचान है, जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जन-आंदोलन का रूप देकर देश को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि खादी आज भी ग्रामीण रोजगार, कुटीर उद्योगों के विस्तार, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी है तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती प्रदान करती है। मेले में खादी से निर्मित आकर्षक परिधान, शॉल, चादरें, बेडशीट सहित अनेक दैनिक उपयोग की वस्तुएं प्रदर्शित एवं बिक्री हेतु उपलब्ध रहीं, जिन्हें जवानों, अधिकारियों एवं उनके परिवारजनों ने उत्साहपूर्वक खरीदा और सराहा। इस अवसर पर उप-कमांडेंट दीपक जायडा, अनिल कुमार यादव, दीपक तोमर सहित वाहिनी के अन्य अधिकारी, जवान व उनके परिवारजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे, और मेले के माध्यम से स्वदेशी उत्पाद अपनाने तथा खादी को जन-जीवन का हिस्सा बनाने का प्रभावी संदेश दिया गया।

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