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लोकसंस्कृति के रंग में रंगा सितारगंज, भव्य प्रस्तुतियों के साथ तीन दिवसीय उत्तरायणी मेले का ऐतिहासिक समापन।

लोकसंस्कृति के रंग में रंगा सितारगंज, भव्य प्रस्तुतियों के साथ तीन दिवसीय उत्तरायणी मेले का ऐतिहासिक समापन।

सितारगंज:(चरनसिंह सरारी)नगर के श्री रामलीला मैदान में उत्तरांचल सांस्कृतिक विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय उत्तरायणी कौतिक मेले का समापन तीसरे दिन अभूतपूर्व उत्साह, भारी जनसैलाब और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। समिति के अध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अंतिम दिन का मंच पूरी तरह स्थानीय कलाकारों और क्षेत्रीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के नाम रहा, जहां नन्हे-मुन्ने बच्चों से लेकर युवा कलाकारों ने गढ़वाली-कुमाऊँनी लोकगीतों, देशभक्ति गीतों और पारंपरिक नृत्यों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। “पहाड़ को ठंड पाणी”, “सुनि कैसि मीठि वाणी”, “छोड़नी नी लागनी”, “खुटि रौड़ि गे”, “तिलगा तेरी लंबी लटी” और “पारै भीड़ै की बसंती छ्योरी” जैसे गीतों पर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों की थिरकन से गूंज उठा। सामूहिक गीतों और लोकनृत्यों को मिले अपार स्नेह से कलाकार भावविभोर दिखे। सफल आयोजन पर अध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट ने आयोजन समिति और जनसमुदाय का आभार जताया, जबकि कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत बोरा ने कहा कि उत्तरायणी कौतिक मेला उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत प्रतीक है और इसके संरक्षण व संवर्धन के लिए युवाओं की सक्रिय भूमिका अत्यंत आवश्यक है।इस मौके पर उत्तरांचल सांस्कृतिक विकास समिति अध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट, फकीर सिंह कन्याल, गोपाल जोशी, आनंद बल्लभ भट्ट, हेमंत बोरा, सतीश उपाध्याय, कैलाश पाठक, धीरेंद्र पंत, संजय जोशी, बलविंदर सिंह,भुवन गड़कोटी, राजेन्द्र बिष्ट,पंकज रावत, नवीन भट्ट निराला आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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