उत्तरायणी मेले में माया उपाध्याय के लोक सुरों से सराबोर हुआ सितारगंज, दूसरे दिन भी सांस्कृतिक उल्लास चरम पर।
14 जनवरी, 2026
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सितारगंज : (चरनसिंह सरारी) पूरे कुमाऊं अंचल में इन दिनों उत्तरायणी मेले की रौनक देखते ही बन रही है और सितारगंज में आयोजित तीन दिवसीय उत्तरायणी मेले ने भी क्षेत्र को लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया है। कड़ाके की ठंड के बावजूद दूसरे दिन मेले में भारी जनसैलाब उमड़ा और लोग उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं को नजदीक से देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे। मेले के दूसरे दिन का विधिवत शुभारंभ कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने किया। मंच पर जैसे ही उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोक गायिका माया उपाध्याय ने अपनी प्रस्तुति शुरू की, पूरा पंडाल तालियों की गूंज और उत्साह से भर उठा। उनके कुमाऊंनी और गढ़वाली गीतों— “चाहा को होटल खोलुलो इत्ति टनकपुर…”, “हाई काकड़ी झिलमा…”, “क्रीम पौडरा घिसने किले नै…”, “लाली हो लाली हंसिया, पधानी लाली तिले धारू बोला…”— पर दर्शक खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं की मौजूदगी ने माहौल को और जीवंत बना दिया। लोकसंगीत के सुरों ने मेले को यादगार बना दिया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने सभी क्षेत्रवासियों को मकर संक्रांति, उत्तरायणी कौतिक एवं घुघुतिया पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की बोली, भाषा, लोककला और वेशभूषा हमारी पहचान हैं, जिन्हें सहेजना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक मेलों के आयोजन से ही हमारी परंपराएं जीवित रहती हैं और युवाओं को आगे आकर अपनी संस्कृति को अपनाने व आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि पहाड़ की लोकसंस्कृति आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।