सिडकुल की धागा फैक्ट्री में मैनहोल बना मौत का कारण! करंट की चपेट में आकर श्रमिक की दर्दनाक मौत, चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।
02 सितंबर, 2026
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सितारगंज/उधमसिंहनगर:(चरनसिंह सरारी) सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक निजी धागा फैक्ट्री में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब मैनहोल में काम कर रहे एक श्रमिक की संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही फैक्ट्री में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और परिजन आनन-फानन में श्रमिक को उप जिला चिकित्सालय सितारगंज लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान नन्हेंलाल पुत्र जमुना प्रसाद के रूप में हुई है। नन्हेंलाल की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पत्नी समेत चार बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक की पत्नी नोनका ने बताया कि वह अपने पति और चार बच्चों के साथ बवनपुरी में रहती हैं, जबकि उनका मूल परिवार सकरस, बहेड़ी, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। उन्होंने बताया कि उनके पति लंबे समय से सिडकुल स्थित धागा कंपनी में काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। पत्नी के अनुसार, नन्हेंलाल पहले भी कई बार बताते थे कि उन्हें फैक्ट्री के मैनहोल में काम करने के लिए भेज दिया जाता है। परिजनों का आरोप है कि बुधवार को भी नन्हेंलाल मैनहोल में काम कर रहे थे और वहां पानी मौजूद होने के कारण अचानक करंट की चपेट में आ गए।
करंट लगने से उनकी हालत बिगड़ गई और आनन-फानन में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। मृतक के भतीजे चंचल कुमार मौर्य ने भी दावा किया कि उनके चाचा की मृत्यु करंट लगने के कारण हुई है। वहीं फैक्ट्री में काम करने वाले एक अन्य कर्मी ने भी नन्हेंलाल की मौत करंट लगने से होने की बात कही है। हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने अभी करंट लगने की स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। फैक्ट्री के एचआर डीपी त्रिपाठी ने कहा कि संभव है कि नन्हेंलाल की मृत्यु करंट लगने के कारण हुई हो, लेकिन उन्हें अभी घटना की पूरी जानकारी नहीं है। उधर, उप जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि नन्हेंलाल पुत्र जमुना प्रसाद को अस्पताल लाया गया था, लेकिन चिकित्सकीय जांच के दौरान वह मृत अवस्था में पाए गए। घटना की सूचना पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
हादसे के बाद अब फैक्ट्री में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था और मैनहोल में काम कराने के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का कहना है कि यदि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते तो शायद नन्हेंलाल की जान बचाई जा सकती थी। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि नन्हेंलाल अपने पीछे पत्नी और चार मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं। पत्नी नोनका का कहना है कि पति की मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी और बच्चों की परवरिश का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि श्रमिक की मौत वास्तव में करंट लगने से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
करंट लगने से उनकी हालत बिगड़ गई और आनन-फानन में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। मृतक के भतीजे चंचल कुमार मौर्य ने भी दावा किया कि उनके चाचा की मृत्यु करंट लगने के कारण हुई है। वहीं फैक्ट्री में काम करने वाले एक अन्य कर्मी ने भी नन्हेंलाल की मौत करंट लगने से होने की बात कही है। हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने अभी करंट लगने की स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। फैक्ट्री के एचआर डीपी त्रिपाठी ने कहा कि संभव है कि नन्हेंलाल की मृत्यु करंट लगने के कारण हुई हो, लेकिन उन्हें अभी घटना की पूरी जानकारी नहीं है। उधर, उप जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि नन्हेंलाल पुत्र जमुना प्रसाद को अस्पताल लाया गया था, लेकिन चिकित्सकीय जांच के दौरान वह मृत अवस्था में पाए गए। घटना की सूचना पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
हादसे के बाद अब फैक्ट्री में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था और मैनहोल में काम कराने के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का कहना है कि यदि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते तो शायद नन्हेंलाल की जान बचाई जा सकती थी। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि नन्हेंलाल अपने पीछे पत्नी और चार मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं। पत्नी नोनका का कहना है कि पति की मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी और बच्चों की परवरिश का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि श्रमिक की मौत वास्तव में करंट लगने से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।