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नारायणपाल के निर्दलीय लड़ने से बदल सकते है भाजपा व कांग्रेस के समीकरण।

नारायणपाल के निर्दलीय लड़ने से बदल सकते है भाजपा व कांग्रेस के समीकरण।

सितारगंज:( ब्यूरो) सितारगंज विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने फिर एक बार फिर बड़ी गलती कर दी है दरअसल वर्ष 2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बंगाली कार्ड खेलते हुए सितारगंज विधानसभा सीट से मालती विश्वास को चुनावी मैदान में उतारा था जो कांग्रेस की बड़ी भूल साबित हुई थी। उधर जानकारों की माने तो कांग्रेस ने एक बार फिर सितारगंज सीट प्रत्याशी चयन में बड़ी चूक कर दी है इस बार कांग्रेस ने सितारगंज के मतदाताओं के बीच अपनी गहरी पैठ रखने वाले सितारगंज और शक्तिफार्म की जनता के बीच लगातार बीते 20 वर्षों से समाजसेवी के तौर पर काम कर रहे दो बार के विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नारायण पाल की टिकट काटकर बड़ी भूल कर दी है।हम आपको बता दें कि भाजपा से लगातार के सिटिंग विधायक सौरभ बहुगुणा के सामने कांग्रेस पार्टी ने ने एक ऐसा चेहरा उतारा है जिसे सितारगंज और शक्तिफार्म की जनता ठीक से नहीं जानती एवं पहचानती भी नहीं है और तो और ना ही कांग्रेस प्रत्याशी सितारगंज की राजनीति को समझता हैं।कुल मिलाकर अगर राजनीति के जानकारों की मानें तो इस बार कांग्रेस प्रत्याशी के चयन में सितारगंज सीट से कांग्रेस हाईकमान ने बड़ी भूल कर दी है और प्रत्याशी चयन में की गई लापरवाही का खामियाजा भी आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। उधर सितारगंज के स्थानीय सूत्रों की माने तो कांग्रेस पार्टी ने प्रत्याशी चयन को लेकर लिए गए अपने निर्णय से खुद सितारगंज विधानसभा सीट को अब भाजपा की झोली में दिया है।सूत्रों की माने तो नारायणपाल के समर्थक कांग्रेस से इस्तीफे दे नारायणपाल को निर्दलीय चुनाव लड़ाने की जिद कर रहे है।अगर ऐसा हुआ तो भाजपा व कांग्रेस दोनों के समीकरणों में फेर बदल हो सकता है और निर्दलीय बाजी जीती जा सकती है।ये सब कयास लगाये जा रहे है। बाकी सब कुछ समय के गर्ब में छिपा है।समय के साथ ही पता चल सकेगा।

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