सितारगंज के पूर्व विधायक पाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से कराया अवगत
सितारगंज:(ब्यूरो) सितारगंज के पूर्व विधायक सितारगंज नारायण पाल ने मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को कोरोना के चलते विधानसभा सितारगंज व नानकमत्ता में ध्वस्त हो चली स्वास्थ्य व्यवस्था के संबंध में एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने प्रदेश के अन्य स्थानों के साथ ही सितारगंज में भी अपनी चपेट में ले रखा है। यहां भी बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव पये जा रहे हैं। सितारगंज, शक्तिफार्म व नानकमत्ता क्षेत्र में करीब ढ़ाई लाख की आबादी हैं। जिसके लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवा के नाम पर सितारगंज का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ही सबसे बड़ा अस्पताल हैं। यहां भी स्वास्थ्य सुविधायें न के बराबर हैं।कोरोना पॉजिटिव हो चुके कई तो घर पर ही उपचार करा रहे हैं। उन्हें दवाओं की जो किट दी जा रही है उसमें पर्याप्त दवायें ही नहीं हैं।जिन रोगियों की हालत बिगड़ रही है उनके लिए सीएचसी में आक्सीजन तक नहीं रोगी की हालत खराब होने पर जब उसका आक्सीजन लेबल गिर रहा है तो उसे हल्द्वानी या रुद्रपुर भेजा जा रहा है। जब तक मरीज वहां पहुंच रहा है उसकी मौत हो जा रही हैं। जो अस्पताल तक पहुंच भी गया उसकी हालत इतनी खराब हो चुकी होती है कि चिकित्सकों के लिए उसे बचाना मुश्किल हो रहा है। हाल ही में नगर पंचायत शक्तिगढ़ के अध्यक्ष सुकांत ब्रम्हम,पूर्व ग्राम प्रधान के भाई गयासुद्दीन व बघोरी की अनीसा वी के मामले में यही हुआ। आक्सीजन के अभाव में उनकी मौत हो गई।साथ ही उन्होंने कहा कि सीएचसी में वैन्टीलेटर की सुविधा भी नहीं हैं न ही कोरोना रोगी के लिए आवश्यक रेमिडिपीवीर इंजेक्शन ही उपलब्ध हैं। वहां मात्र तीन चिकित्सक कार्यरत हैं। प्रशासन ने कोरोना रोगियों के लिए कोई ढंग का निजी अस्पताल तक हायर नहीं किया है। प्रयास हास्पिटल के नाम से एक अस्पताल को हायर किया बताया जा रहा है लेकिन उसमें किसी मरीज को उपचार मिला ही नहीं महोदय कोरोना रोगियों के लिए इस लचर व्यवस्था से क्षेत्र की जनता काफी आक्रोशित हैं। जिसके चलते शीघ्र ही क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थायें दुरुस्त की जायें।