रूद्रपुर के फुटपाथों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा,पैर रखना भी हुआ मुश्किल
रूद्रपुर:(ब्यूरो)। उत्तराखण्ड राज्य के कुमांऊ क्षेत्र का प्रवेश द्वार एवं राज्य का प्रमुख औद्यौगिक क्षेत्र जिला मुख्यालय रूद्रपुर महानगर का बाजार पिछले काफी समय से अतिक्रमण की चपेट में आया हुआ है। यहां मुख्य बाजार में तमाम व्यापारियों द्वारा निजी स्वार्थों के चलते अपनी दुकानों के आगे फड़ व ठेली के माध्यम से कारोबार करने वाले व्यापारियों को जगह उपलब्ध कराई गई है। जिस कारण लोगों को बाजार में अतिक्रमण के चलते वाहन के साथ तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है और उन्हें सामान खरीदने के लिए परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। बाजार में व्यापारियों द्वारा फुटपाथो ंपर किये गये पक्के निर्माण के खिलाफ उच्च न्यायालय के आदेश पर नगर निगम द्वारा उन्हे तोड़ा तो जा चुका है लेकिन नगर निगम द्वारा इसकी माॅनिटरिंग न किये जाने के चलते पुनः व्यापारियों ने फुटपाथों पर सामान और ठेले लगवाकर अतिक्रमण कर लिया है। नगर निगम के अधिकारियों का ध्यान अतिक्रमण को हटाकर आम जनता की परेशानियों को दूर करने के बजाये सिर्फ फड़ ठेली वालों से तहबाजारी वसूलने तक ही सीमित होकर रह गया है। जहां तक पुलिस प्रशासन की बाजार क्षेत्र में व्यवस्थाओं की बात करें तो पुलिस अधिकारियों द्वारा बाजार में प्रातः 9 बजे से रात्रि 8 बजे तक वाहनों के लिए नो एन्ट्री की कई बार व्यवस्था बनाई जा चुकी है। परंतु अधिकारी इस व्यवस्था को निरन्तर बनाये रखने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं। बाजार क्षेत्र में जिन महिला व पुरूष पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है वह अपनी जिम्मेवारियों को बिल्कुल भी नहीं निभा रहे हैं। ड्यूटी के नाम पर उनके द्वारा महज खानापूर्ति ही की जाती है। बाजार क्षेत्र में विधवानी मार्केट, गुड़ मण्डी, अम्बेडकर चैक से गल्ला मण्डी, दुर्गा मंदिर गली, गोल मार्केट, गांधी पार्क रोड़, पांच मंदिर रोड़, सब्जी मंडी, भगत सिंह चैक सहित तमाम ऐसे बाजार क्षेत्र हैं जहां सड़कों एवं फुटपाथ पर कई फुट अतिक्रमण कर लोगों की समस्याओं को न सर्फ बढ़ाया जा है बल्कि निगम, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कानून की भी खिल्ली उड़ाई जा रही है। पूर्व में उच्च न्यायालय के निर्देश पर जन हित में बाजार क्षेत्र में अधिकारियों द्वारा कई दिनों तक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था। जिसके पश्चात निगम प्रशासन द्वारा बाजार में सड़कों व फुटपाथों से अतिक्रमण हटवाकर वहां निर्माण कराया गया। ताकि बाजार में खरीददारी करने आने वाले लोगों को किसी भी परेशानियों का सामना न करना पड़े। लगता है निगम अधिकारियों का काम यहीं पर ही समाप्त हो गया है। बाजार क्षेत्र में सड़के चैड़ी करने व पुफटपाथ बनाने का लाभ आम जनता को मिल रहा है या नहीं इसकी सुध लेने का उनके पास कोई समय नहीं है। बाजार क्षेत्र में अतिक्रमण क्यों होता है? यदि इस पर गंभीरता से चिंतन करें तो इसके पीछे मुख्य कारण अतिक्रमण को बढ़ावा देने वाले व्यापारियों को किसी न किसी रूप में व्यापार मंडल का संरक्षण मिलना है। जबकि व्यापार मंडल पदाधिकारियों के साथ व्यापारी भी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि बाजार में ग्राहक तभी आता है जब उसे सामान खरीदने में कोई परेशानी न हो। बाजार में खड़े एवं गुजरते वाहनों से महिलाओं को खुद के साथ अपने छोटे बच्चों को सुरक्षित बचाना जोखिम भरा हो जाता है। वहीं मार्गों व दुकानों के आगे फुटपाथ व ठेलों पर सामान बेचने वालो के कारण लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बाजार क्षेत्र में भीड़ का फायदा आपराधिक तत्व उठाते हैं। बाजार में दिनदहाड़े छीनाझपटी, लूट, चोरी जैसी कई घटनायें हो चुकी हैंै। ऐसी स्थिति में ग्राहक बाजार में आकर सामान खरीदने के बजाये अपने घर के आसपास मौजूद दुकानों से ही सामान खरीदना बेहतर समझता है। उधर बाजार का अधिकांश व्यापारी ग्राहक का इंतजार करता रहता है। यदि व्यापार मंडल अपने ही व्यापारियों का भला चाहता है तो उसे सभी व्यापारियों को किसी भी दशा में दुकान के आगे किसी भी तरह का अतिक्रमण न करने के लिए प्रेरित करना होगा। साथ ही अतिक्रमण कारी व्यापारियों को संरक्षण देना पूरी तरह से बंद करना होगा। हां यदि किसी अधिकारी द्वारा किसी व्यापारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही की जाती है तो व्यापार मंडल के पदाधिकारियों को मौके पर पहुंचकर पहले वास्तविक स्थिति को समझना होगा यदि अधिकारियों द्वारा की जा रही कार्यवाही सही है तो उस व्यापारी को समझाना होगा और यदि वास्तव में व्यापारी का उत्पीड़न हो रहा है तो इसका विरोध करना उचित होगा। नगर के बाजार क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त करने का पहला दायित्व स्वयं व्यापार मंडल का है। यदि बाजार में अतिक्रमण ही नहीं होगा तो अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाने की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी और बाजार में ग्राहकों की संख्या बढ़ने से इसका लाभ निश्चित रूप से व्यापारियों को मिलेगा। उल्लेखनीय है कि न्यायालयों के सख्त दिशा निर्देशों के बावजूद लोग फुटपाथों पर कब्जा जमाकर धड़डल्ले से चांदी काट रहे है।जिला एवं नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। मुख्य बाजार में फुटपाथों पर बोर्ड लगाकर रखे जा रहे है जिससे यातायात बाधित हो रहा है। अधिकांश क्षेत्रें में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के बाहर बने फुटपाथों पर वाहनों के साथ ही फड़ लगाकर तो कहीं रोजगार के नाम पर चाऊमीन मोमो एवं चाट के ठेले लगाकर नियमों की खुलेआम धाज्जियां उडाई जा रही हैं । इतना ही नहीं अधिकांश सड़कों के किनारे खोले जा रहे प्रतिष्ठनों के बाहर दो पहिया वाहनो की सर्विस सड़क पर की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ नगर निगम प्रशासन द्वारा आये दिन अभियान चलाये जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। महज चालान और चेतावनी देकर खानापूर्ती की जा रही है जिससे क्षेत्र में बढ़ते जा रहे अतिक्रमण कारियों के हौसले पस्त नहीं हो रहे है।
व्यापार मण्डल सिर्फ अपनी नेतागिरी चमकाने तक सीमित
रूद्रपुर। बाजार क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान का विरोध व अतिक्रमणकारी व्यापारियों को संरक्षण देने के नाम पर व्यापार मंडल सिर्फ अपनी नेतागिरी चमकाने तक ही सीमित होकर रह गया है। व्यापार मंडल की नीति से अब यह स्पष्ट हो गया है कि व्यापार मंडल सिर्फ व्यापारियों का ही हितैषी है। उसके सामने बाजार में आने वाले ग्राहकों व आम जनता की परेशानियों से कोई मतलब नहीं। जबकि ग्राहकों की बदौलत ही
व्यापारियों का कारोबार चलता है। नेतागिरी का पीछे छोड़ जनहित में अब व्यापार मंडल को बाजार में अतिक्रमण को लेकर अपनी नीतियों में परिवर्तन करना ही होगा। अतिक्रमण करने व इसे बढ़ावा देने वाले व्यापारियों
पर अंकुश लगाने के लिए व्यापार मंडल को खुद आगे आना होगा।
टुक-टुक और चारपहिया वाहनों की हो नो-एंट्री
रूद्रपुर। बाजार क्षेत्र में तिपहिया व चैपहिया वाहनों के प्रवेश पर कड़ाई से रोक लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापार मंडल के साथ बैठक करने के बाद कई बार आदेश जारी किये परन्तु व्यापार मंडल के अपेक्षित सहयोग के बिना यह व्यवस्था कभी भी धरातल पर अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकी। बाजार के मागों में भारी संख्या में तिपहिया एवं चैपहिया वाहन घूमने व मार्ग के बीचों बीच पार्क करने से आम जनता की परेशानियां दिनोदिन बढ़ती ही जा रही हैं। पुलिस अधिकारियों को अब बाजार क्षेत्र में जनहित में तिपहिया व चैपहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रभावी ढ़ंग से रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने ही होंगे। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई भी करनी होगी। पुलिस अधिकारियों को ड्यूटी पर तैनात किये गये पुलिसकर्मियों की इस सन्दर्भ में जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी।
फुटपाथ घेरने वालों के नियमित रूप से कटे चालान
रूद्रपुर। नगर निगम द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश पर फुटपाथ से अतिक्रमण तो हटवा कर उसका निर्माण कराया जा चुका है लेकिन उसकी माॅनीटरिंग न होने के चलते पुनः फुटपाथों पर कब्जा हो चला है जिसके चलते बाजार आने वाले ग्राहकों सहित आम जनता को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों ने अपनी दुकानों के आगे ठेले और फड़ लगवाये जाने के चलते बाजार क्षेत्र की सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। दोपहर होते-होते बाजार में जाम जैसी स्थिति बन जाती है। इस ओर न तो व्यापार मण्डल का ध्यान जा रहा है और न ही प्रशासन की आंखों से पट्टी हट रही है। यदि नगर निगम बाजार क्षेत्र की माॅनीटरिंग कर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ चालान की प्रक्रिया अपनाये तो जहां एक ओर नगर निगम की आय में इजाफा होगा तो वही दूसरी ओर बाजार में अतिक्रमण पर भी अंकुश लगेगा।


